top of page

The very emergence of concept of ENVIRONMENTAL AWARENESS has its genesis in the problems created by the economic development v/s environment. Economic development is the necessity of the time and cannot be curtailed but best is to handle them cautiously.

हास्य

में कैसे खेलूं होली, में काहे खेलूं होली,

जिसको मेरी था होना वो किसी और कि होली |

 

--------

हम देश में हरित क्रांति ला रहे हैं,

जगह जगह हरे चश्मे बटवा रहे हैं |

 

--------

व्यंग्य

भूख ने मारा जिन्हें है ज़िन्दगी ही मौत,

जीने की फिर भी आस है तेरे शेरे में |

 

--------

दुनिए में सब हैं तेरे, नहीं कोई है पराया,

राह में गिरे जो, उनको उठा के देखो |

 

तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा बात ये बन भी जाएगी,

कातिल तुम नहीं होगे, हमारी जान भी जाएगी |

 

--------

 

गीत

ये अजब आलम भले दुनिया का देखिये,

जानवर हैं कीमती, इंसान सस्ते हैं |

  • Wix Facebook page
  • Wix Twitter page
  • Wix Google+ page

हमने बदन जो बेच दिया क्या बुरा किया,

कौड़ी के मोल उनके तो ईमान बिकते हैं |

bottom of page